मल्हार
(1)
ज्ञान हिंडोला साधो भाई गढ़ि रहयौ जी एजी कोई सतगुरू के दरबार।
धर्म की डोरी साधो भाई घल रही जी ऐजी कोई श्रद्धा की पटरी घाल। ज्ञान……
झोटा तो सतगुरू साधो भाई दै रहे जी, ऐजी कोई आनंद की आई है बहार। ज्ञान……
चतुर सखा सब साधो भाई झूलते जी ऐजी कोई मूरख करत विचार। ज्ञान..
आनंद के बादल साधो भाई झुक रहे जी. एजी कोइ बरसें मूसलाधार। ज्ञान…….
सब साधन की भईया मेरे अरज है जी, एजी हमें दर्शन देउ एक बार। ज्ञान……
सत चित आनंद साधो मेरे सतगुरू जी, एजी कोई परम हंस अवतार। ज्ञान…
(2)
अरे साधो सतसंग की आई है बहार,
सतगुरू के चलौ द्वार पै।
सतगुरू के द्वारे सतसंग है रहयौ,
अरे साधो दे रहे आतम ज्ञान। सतगुरु……..
पांच भूतों से न्यारी आत्मा अरे साधो तीन गुणन से आतमटार। सतगुरु……..
अन्तः करण की पटली लग रही अरे साधो अहम ब्रहम की फुआर। सतगुरु……..
साध तो प्यासे सतगुरू ज्ञान के, अरे साधो सतगुरू ही एक आधार। सतगुरु……
(3)
अरे साधो सतसंग है जीवन आधार सतसंग में सब बैठिये।
ब्रहम ज्ञान की वाणी चल रही अरे साधो प्रेम का चल रहा पाठ। सतसंग……
माया ममता से सब निकलिये अरे साधो ब्रहम से नेह लगाय। सतसंग……
मन अपने को निर्मल कीजिये अरे साधो पाओगे खुशी अपार। सतसंग…….
वचन गुरु के सब मानिये, अरे साधो हो जाये बेड़ा पार । सतसंग…
(4)
अरे साधो मत करो काया कौ गुमान, काया तो दिन चार की।
सीता सती सी साधो ना रही, अरे साधो जिनके पति थे श्री राम। काया……
मन्दोदरी सी रानी ना रही अरे साधो जिनके थे सोने के मकान। काया…….
द्रोपदी सी रानी साधो न रही अरे साधो चीर बढ़ायो घनश्याम। काया……
काया काया और माया साधो न रहे, अरे साधो कह गये सन्त सुजान। काया………